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किडनी मूत्राशय की पथरी – कारण, किस्में और उपचार

किडनी मूत्राशय की पथरी का बनना एक सामान्य, साधारण बात है.

ऐसा नहीं है कि इसके लिये केवल खान पान को ही दोषी मान लिया जाए या फिर केवल अनुवांशिकता को.

यदि ऐसा होता, तो एक ही परिवार के सब सदस्य इससे प्रभावित या अप्रभावित होते.

आईये जानते हैं, किडनी मूत्राशय की पथरी के लक्षण, कारण, किस्में व इलाज (Causes, symptoms and treatment of kidney and urinary tract stones or calculi) के बारे में…

किडनी मूत्राशय की पथरी के कारण

यदि ऐसे कारणों को ढूँढना हो जो आपके खानपान से सम्बन्ध रखते हों तो वे हैं

कि आप पानी कम पीते हैं

और ऐसे आहार लेते हैं जिनमें ऑक्सालेट, कैल्शियम अधिक हो, या फिर ऐसे जो यूरिक एसिड अधिक बनाते हों.

शारीरिक चयापचय असंतुलन से हमारी नैसर्गिक क्रियायें भी आगे पीछे होने लगती हैं.

जिस कारण हम कुछ रोगों के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाते हैं, जब कि अन्य के प्रति कम.

पथरी रोग का मुख्य कारण भी यही असंतुलन है.

बड़े ही कम लोगों में अनुवांशिकता भी एक कारण हो सकता है.

तेज़ एंटीबायोटिक्स, स्टेरॉयडस व दर्द निवारक (NSAIDs) दवाओं के अनियंत्रित उपयोग भी हमारी मूलभूत संरचना को बिगाड़ देते हैं;

और हमें पथरी, डायबिटीज, थायरॉयड, मोटापा इत्यादि अनेक रोग रिटर्न गिफ्ट में मिल जाते हैं.

किडनी मूत्राशय की पथरी की किस्में

किडनी अथवा गुर्दे की पथरी की मुख्यतः चार किस्में होती है. (1)

1 कैल्शियम के स्टोन

2 यूरिक एसिड के स्टोन

3 स्टरुवाईट (Struvite) स्टोन

4 सिस्टिन (Cystine) स्टोन

1 कैल्शियम के स्टोन

ये सब से अधिक होने वाली पथरी की किस्म है.

इस प्रकार की पथरी कैल्शियम ऑक्सालेट या कैल्शियम फॉस्फेट से बनती है जिसमें कुछ अन्य घटक भी हो सकते हैं.

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इसके पीछे रक्त में अधिक कैल्शियम का होना पाया जाता है, जो पैराहाइपर थायरॉयड के कारण भी हो सकता है. (2)

शरीर में सामान्य से अधिक ऑक्सालेट की मात्रा का बने रहना भी इसका कारण होता है.

इस किस्म के स्टोन आहार में बदलाव व दवाईयों से ठीक किये जा सकते हैं.

2 यूरिक एसिड के स्टोन

इस प्रकार के स्टोन यूरिक एसिड से बनते हैं जो हमारे शरीर का एक त्याज्य उत्पाद है.

सामान्यत:, यूरिक एसिड पसीने व मूत्र के द्वारा शरीर से बाहर निष्काषित होता रहता है.

इस प्रकार के स्टोन के पीछे कम मूत्र निसर्जन एक मुख्य कारण है, जो कम पानी पीने के कारण हो सकता है.

गाउट, अधिक मांसाहार, अल्कोहल व पेट की सूजन भी इसके कारक हो सकते हैं.

यूरिक एसिड के स्टोन को भी आहार में बदलाव व दवाओं से ठीक और नियंत्रित किया जा सकता है. (3)

3 स्टरुवाईट (Struvite) स्टोन

इस प्रकार के स्टोन तब पनपते हैं जब किडनी या मूत्रतंत्र किसी इन्फेक्शन से ग्रसित हो.

महिलाएं इस प्रकार के स्टोन से अधिक ग्रसित होती हैं क्योकि उनमें मूत्रतंत्र की इन्फेक्शन का खतरा अधिक होता है.

स्टरुवाईट के स्टोन भी दवाओं से निपटाए जा सकते हैं.

कई बार ये बहुत बड़े हो जाते हैं जिस कारण इन्हें निकालने के लिये सर्जरी का सहारा लेना पड़ सकता है. (4)

4 सिस्टिन (Cystine) स्टोन

इस किस्म की किडनी मूत्राशय की पथरी सब से कम पाई जाती है.

ये कुछ हद तक अनुवांशिक विसंगति है तथा उन परिवारों में पाई जाती है जिनके मूत्र में सिस्टीन नामक रसायन की अधिकता हो.

इसे Cystinuria नामक विसंगति के नाम से भी जाना जाता है. (5)

सिस्टीन स्टोन अधिक कठोर हो जाते हैं जिस कारण इनके निवारण के लिये अधिक लम्बे समय तक दवाओं का सेवन करना पड़ता है.

अधिक बड़े हो जाने पर ये स्टोन भी अत्यंत पीड़ादायी हो सकते हैं और फिर सर्जरी ही एक विकल्प बचती है. (6)

पथरी stone की किस्मों की व्यापकता

पथरी के उपरोक्त प्रकार में से पहली दो किस्मों की पथरी सबसे अधिक पाई जाती है.

जबकि तीसरे प्रकार की पथरी बहुत ही कम होती है.

अंतिम किस्म की पथरी लाखों में से एक व्यक्ति में मिलती है.

क्यों होती है बार बार पथरी

पथरी की किस्में जानने के बाद ये स्पष्ट हो जाता है कि किडनी मूत्राशय की पथरी बनने के मुख्य कारण के पीछे कैल्शियम, ऑक्सालेट व यूरिक एसिड की अधिकता का एक अहम योगदान रहता है.

जब तक शरीर में इनकी अधिकता रहेगी, पथरी भी बनती रहेगी.

इसलिए यदि एक बार किडनी मूत्राशय की पथरी दवाओं से निकल गयी है तो इसका ये मतलब नहीं कि दोबारा नहीं होगी.

क्या हैं उपाय

क्योंकि पथरी बार बार पनप सकती है, इसलिए आपको अपनी पथरी के नियत्रण करने के उपाय अवश्य जानने और अपनाने चाहिए.

अब आप जानते हैं कि पथरी बनने में कैल्शियम, ऑक्सालेट व यूरिक एसिड की अधिकता और कुछ दूसरे कारक होते हैं.

यदि आप एक बार भी स्टोन से ग्रसित हो चुके हों और दवा के उपयोग से आपकी पथरी निकल चुकी हो;

तो भी आपको कुछ सावधानियां लेने की आवश्यकता है.

बार बार पथरी का इलाज दवाइयों से करवाने से बचने के लिये ये विकल्प लाभकारी साबित हो सकते हैं.

1 पानी अधिक पियें

अधिक पानी पीने से मूत्र अधिक आएगा व कैल्शियम, ऑक्सालेट या यूरिक एसिड भी इसके साथ बाहर निकलते रहेंगे.

यदि आपको कभी किडनी मूत्राशय की पथरी बनी है या आपके परिवार में पथरी का इतिहास रहा है, तो आजीवन पानी अधिक पीने की आदत डाल लीजिये.

हर एक घंटे में एक गिलास पानी पीते रहेंगे तो यह रोग आपके पास आएगा ही नहीं.

2 जांच करवा लें

जांच से ये पता लगाया जा सकता है कि आपके शरीर में किस की अधिकता है, जिस कारण आपको पथरी बनती है.

फिर उस प्रकार के आहारों का सेवन कम कर दें जो ऑक्सालेट, कैल्शियम या यूरिक एसिड बढ़ाते हैं.

3 पथरी निवारक (Lithotriptic) टॉनिक लें

साल भर में एक दो बार, पथरी व मूत्रतंत्र संक्रमण (Calculi और UTI) निवारक टॉनिक एक आधा महीना ले लिया करें.

ये टॉनिक, गोखरू, पाषाणभेद, पुनर्नवा, भूमिआंवला, वरुण की छाल, इत्यादि ऐसी वनस्पतियों से बनते हैं जो किडनी मूत्राशय की पथरी का क्षरण कर मूत्र मार्ग से निकाल देते हैं.

4 पथरी रोधी आहार लें

अपनी भोजन शैली में पथरी निवारक (Lithotriptic) आहारों जैसे चौलाई के बीज व साग, कुल्थी की दाल, इत्यादि को विशेष स्थान दें.

इनका भरपूर उपयोग करें.

कुल्थी की दाल घर पर रखें.

इसकी भिगोई दाल को पीस कर कड़ी बनाईये, रोटी में स्टफ करिए; कई विकल्प हैं.

इसका सप्ताह में एक बार अवश्य उपयोग करें.

याद रहे कुल्थी की दाल बड़ी मुश्किल से गलती है, इस कारण इसे अकेले मत बनाईये, अपितु अन्य दालों के बीच डाल दिया करें.

चौलाई को वनस्पति शास्त्र में amaranthus कहते हैं.  इसकी कई किस्में होती हैं.

चौलाई के बीजों को अंकुरित कर नाश्ते में लीजिये, या फिर इसका साग खाईये.

पथरी निवारण के कई घरेलू उपचार भी प्रचलित हैं, जिन्हें इस लिंक पर पढ़ा जा सकता है.

भारत में पथरी रोग

अंत में, यदि आप पथरी रोग से ग्रसित हैं, तो आप अकेले नहीं हैं.

एक सर्वेक्षण के अनुसार, भारत में 10 लाख से अधिक लोग इस विसंगति को हर वर्ष झेलते हैं.

सारशब्द

किडनी मूत्राशय की पथरी रोग के पीछे कैल्शियम, ऑक्सालेट, यूरिक एसिड की अधिकता, इन्फेक्शन व अनुवांशिकता के कारण रहते है.

कुछ प्रकार की पथरी बार बार भी बन सकती है.

सावधानी रखिये, किडनी मूत्राशय की पथरी होना कोई बड़ी बात नहीं और इसका इलाज भी आसानी से किया जा सकता है.

आहार में थोडा बदलाव कर व कुछ सावधानियां अपनाने से पथरी रोग से बचा जा सकता है.





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