जीवन है संग्राम - जगत में कहीं नहीं विश्राम

जीवन है संग्राम – जगत में कहीं नहीं विश्राम

संसार में यदि कहीं कोई जगह या स्थिति है जहाँ पूर्ण आनंद और शांति मिले… तो वह है, परमेश्वर का सानिध्य ध्यान, सिमरन, जाप, कीर्तन-भजन; सानिध्य के साधन हैं. यह गायन इसी आशय की जीवंत प्रस्तुति है. सुनिए और आनंद लीजिये अलोक सहदेव जी के इस मधुर गायन का. आप इसे डाउनलोड भी कर सकते […]

शेयर कीजिये
मौन भाव - अदभुत गायन, एकान्त में सुनिये

मौन भाव – अदभुत गायन, एकान्त में सुनने योग्य

संतजन हमेशा ही मौन की महता समझाते रहे है. मौन भाव मौन का अभ्यास मानसिक रोगों जैसे चिंता, व्यग्रता, तनाव, संताप, अनिद्रा, ब्लडप्रेशर इत्यादि से रोगमुक्ति की अनुपम औषधि भी है. अपने आप को कभी भी, कमरे में बंद कर या किसी एकांत में, इस अनुपम प्रस्तुति का आनंद उठाईये. सुनिए, मौन भाव के गीत […]

शेयर कीजिये
राम से अनुराग करिये

राम से अनुराग करिये

राम से अनुराग करिये सृष्टि में जो कुछ समाहित है वही एक स्वाद जो राम है वस राम प्राणी, कुछ नहीं विवाद जो जीव  में धड़कन वही है अग्नि में है आग जो भक्ति की गंगा है बहती नित बसंत भाग जो शक्ति के हैं पुंज वो तो मोह संग वैराग जो राम में अनुरक्त रहिये […]

शेयर कीजिये

जो भजे हरी को सदा

जो भजे हरी को सदा, सो परम पद पायेगा राम जो भजे हरी को सदा, सो परम पद पायेगा फेर के माला, तिलक और भस्म नहीं कुछ काम के प्रेम भक्ति के बिना, कहीं हाथ के मन आयेगा? दिल के दर्पण को सफा कर, भूल कर अभिमान को खाक हो गुरु के चरण की, तो प्रभु मिल जायेगा छोड़ […]

शेयर कीजिये

तुम ही मैं हूँ, फिर चिन्तन क्या – आलौकिक भजन

आदरणीय आलोक सहदेव जी द्वारा श्रीरामशरणम् को समर्पित आलौकिक भजन, सेवा में प्रस्तुत तुम ही मैं हूँ, फिर चिन्तन क्या, मैं ही तुम हो, फिर उलझन क्या तुम ही मैं हूँ, मैं ही तुम हो… सब के भीतर एक ब्रह्म है, तेरी मेरी फिर अनबन क्या तुम ही मैं हूँ, मैं ही तुम हो… सारा झगडा […]

शेयर कीजिये

झीनी झीनी चदरिया

कबीर जी की अमर रचना… पंडित कुमार गन्धर्व का अमर गायन सुनिए इस अमर रचना का मनोहारी गायन

शेयर कीजिये

माला फेरी तिलक लगाया

संत कबीर जी अनुपम कालजयी रचना का लोकगीत रूपान्तर अदभुत शास्त्रीय गायन : श्री राजन साजन मिश्रा बन्धु  

शेयर कीजिये