मन चंचल, चल राम शरण में

मन चंचल, चल राम शरण में – यही है आनन्द की सही कुन्जी

    मनसा वाचा, कर्मणा, मैं हूँ मेरे राम, अर्पित तेरी शरण में, सहित कर्म शुभ काम ॥ मन चंचल, चल राम शरण में राम ही तेरा जीवन साथी, नित्य हितैषी, सब दिन साखी, दो दिन के हैं, ये जग वाले, हरि अंग संग है, जन्म मरण में ॥१॥   जग में तूने प्यार बढ़ाया, […]

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भए प्रगट कृपाला, दीनदयाला

भए प्रगट कृपाला, दीनदयाला, कौसल्या हितकारी॥

रामनवमी पर्व की बधाई, मंगल कामनाएं!! आनंद लीजिये गोस्वामी तुलसीकृत रामचरित मानस की रामावतरण चौपाईयों का, जिन्हें लगभग सभी शीर्ष गायकों ने स्वरबद्ध किया है. यह गायन स्वर्गीय जगजीत सिंह जी की प्रस्तुति है.     भए प्रगट कृपाला, दीनदयाला, कौसल्या हितकारी। हरषित महतारी, मुनि मन हारी, अद्भुत रूप बिचारी॥ लोचन अभिरामा, तनु घनस्यामा, निज […]

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मन चंचल, चल राम शरण में

जीवन है संग्राम – जगत में कहीं नहीं विश्राम

संसार में यदि कहीं कोई जगह या स्थिति है जहाँ पूर्ण आनंद और शांति मिले… तो वह है, परमेश्वर का सानिध्य ध्यान, सिमरन, जाप, कीर्तन-भजन; सानिध्य के साधन हैं. यह गायन इसी आशय की जीवंत प्रस्तुति है. सुनिए और आनंद लीजिये अलोक सहदेव जी के इस मधुर गायन का. आप इसे डाउनलोड भी कर सकते […]

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मौन भाव - अदभुत गायन, एकान्त में सुनिये

मौन भाव – अदभुत गायन, एकान्त में सुनने योग्य

संतजन हमेशा ही मौन भाव की महता समझाते रहे है. मौन भाव मौन का अभ्यास मानसिक रोगों जैसे चिंता, व्यग्रता, तनाव, संताप, अनिद्रा, ब्लडप्रेशर इत्यादि से रोगमुक्ति की अनुपम औषधि भी है. अपने आप को कभी भी, कमरे में बंद कर या किसी एकांत में, इस अनुपम प्रस्तुति का आनंद उठाईये. सुनिए, मौन भाव के […]

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राम से अनुराग करिये

राम से अनुराग करिये

राम शब्द सर्वोच्च सत्ता का द्योत्तक है, जिसका वर्णन वेदों में मिलता है. संत शिरोमणि रामानंद जी (जिनके शिष्य कबीर, रविदास, धन्ना, पीपा जैसे महात्मा संत हुए), गुरु नानक देव जी; सब ने सिमरन में राम नाम सबसे उत्कृष्ट बताया है. सुनिये इस कालजयी संगीत को और आत्मिक आनंद लीजिये… राम से अनुराग करिये   […]

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जो भजे हरी को सदा, सो परम पद पायेगा

जो भजे हरी को सदा, सो परम पद पायेगा राम जो भजे हरी को सदा, सो परम पद पायेगा देह के माला, तिलक और भस्म नहीं कुछ काम के प्रेम भक्ति के बिना, कहीं हाथ के मन आयेगा? दिल के दर्पण को सफा कर, भूल कर अभिमान को खाक हो गुरु के चरण की, तो प्रभु मिल जायेगा छोड़ […]

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तुम ही मैं हूँ, फिर चिन्तन क्या – आलौकिक भजन

आदरणीय आलोक सहदेव जी द्वारा श्रीरामशरणम् को समर्पित आलौकिक भजन, सेवा में प्रस्तुत तुम ही मैं हूँ, फिर चिन्तन क्या, मैं ही तुम हो, फिर उलझन क्या तुम ही मैं हूँ, मैं ही तुम हो… सब के भीतर एक ब्रह्म है, तेरी मेरी फिर अनबन क्या तुम ही मैं हूँ, मैं ही तुम हो… सारा झगडा […]

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माला फेरी तिलक लगाया – आत्मिक शास्त्रीय गायन

संत कबीर जी अनुपम कालजयी रचना का लोकगीत रूपान्तर अदभुत शास्त्रीय गायन : साभार श्री राजन साजन मिश्रा बन्धु   Copyright protected by Digiprove © 2017

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