जगत का बोध

जगत का बोध भी करना जानिये – आत्मिक लाभ ज़रूर मिलेगा

एक सीधा सादा वैरागी साधू जिसे जगत का बोध नहीं था; विचरण करते करते थका, प्यासा हो गया था. किसी नदी के पनघट पर पहुंचा, पानी पिया और सुस्ताने का मन हुआ. पत्थर पर सिर रखकर सो गया….!!! पनघट पर पनिहारिन आती-जाती रहती हैं !!! वे आईं और साधू को सोते देखा. एक ने कहा- […]

पूरा पढ़िये
जीवन है अनमोल जीवन सार जीवन का अर्थ जीवन उपहार है

जीवन है अनमोल – जानिये, कितने भाग्यशाली हैं आप

जीवन के कई अर्थ लगाये जा सकते हैं. लेकिन सभी अर्थ और भावार्थ एक ही लक्ष्य को इंगित करते हैं. कि ‘जीवन है अनमोल’ बुरा कहने से बचें… सोचिये उनके बारे में, जो बोल भी नहीं सकते. हमें वाणी मिली है…. कितनी बड़ी ईश्वरीय देन है. जब मुख-जिव्हा स्वादिष्ट व्यंजन ही पसंद करते हैं. तो […]

पूरा पढ़िये
दुनियां में सिकन्दर कोई नहीं duniya-mein-sikandar-koi-nahin

दुनियां में सिकन्दर कोई नहीं

सिकन्दर उस जल की तलाश में था, जिसे पीने से मानव अमर हो जाते हैं.!   काफी दिनों तक देश दुनियाँ में भटकने के पश्चात आखिरकार सिकन्दर ने वह जगह पा ही ली, जहाँ उसे अमृत की प्राप्ति होती !   वह उस गुफा में प्रवेश कर गया, जहाँ अमृत का झरना था, वह आनन्दित […]

पूरा पढ़िये

प्रारब्ध सार

डॉ गौतम चैटर्जी जब आत्मा शरीर तत्व को प्राप्त करता है उसको प्रारब्ध भी मिलते हैं। भाग्य की यात्रा और कुछ नहीं बल्कि तपिश सहना है, जैसे सोना जब गर्म किया जाता है तब उसकी चमक व निखार उभरता है। यह तप व राम नाम आराध्य तपस्या भाग्य की एक सम्पूर्ण यात्रा में परिवर्तित हो जाती […]

पूरा पढ़िये
लक्ष्मी निवास

लक्ष्मी निवास

एक बूढे सेठ थे… वे खानदानी रईस थे, धन-ऐश्वर्य प्रचुर मात्रा में था परंतु लक्ष्मीजी का तो है चंचल स्वभाव। आज यहाँ तो कल वहाँ!! सेठ ने एक रात को स्वप्न में देखा कि एक स्त्री उनके घर के दरवाजे से निकलकर बाहर जा रही है। उन्होंने पूछा : ‘‘हे देवी आप कौन हैं? मेरे […]

पूरा पढ़िये

मायाजाल

रात हो गई थी। एक इंसान घने जंगल में भागा जा रहा था। अंधेरे में कुआं दिखाई नहीं दिया और वह उसमें गिर गया। गिरते-गिरते कुएं पर झुके पेड़ की एक डाल उसके हाथ में आ गई। जब उसने नीचे झांका, तो देखा कि कुएं में अजगर मुंह खोले उसे देख रहा है |

पूरा पढ़िये
जीवन सार

जीवन सार – यही सच है

जीवन सार जीवन सार क्या है ? जीवन का उद्देश्य उसी चेतना को जानना है – जो जन्म और मरण के बन्धन से मुक्त है। उसे जानना ही जीवन सार है, मोक्ष है..!! जन्म और मरण के बन्धन से मुक्त कौन है ? जिसने स्वयं को, उस आत्मा को जान लिया – वह जन्म और […]

पूरा पढ़िये