जीवन है संग्राम

मन चंचल, चल राम शरण में – यही है आनन्द की सही कुन्जी

    मनसा वाचा, कर्मणा, मैं हूँ मेरे राम, अर्पित तेरी शरण में, सहित कर्म शुभ काम ॥ मन चंचल, चल राम शरण में राम ही तेरा जीवन साथी, नित्य हितैषी, सब दिन साखी, दो दिन के हैं, ये जग वाले, हरि अंग संग है, जन्म मरण में ॥१॥   जग में तूने प्यार बढ़ाया, […]

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मौन की महिमा

मौन की महिमा – रोज़ रखिये और पाईये आश्चर्यजनक लाभ

मौन से वह सब घटित हो सकता है जो बोलने से नहीं होता। यही है मौन की महिमा. जब तक मन है तब तक सांसारिक उपद्रव हैं मन गया कि संसार भी गया; और संन्यास शुरू। यहाँ सन्यास का का अर्थ है फ़िज़ूल के विचारों और कर्मों से जुड़े रहने का भाव. योग कहता है… ऊर्जा और सत्य का द्वार है मौन […]

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जीवन है संग्राम

जीवन है संग्राम – जगत में कहीं नहीं विश्राम

जीवन है संग्राम – संसार में यदि कहीं कोई जगह या स्थिति है जहाँ पूर्ण आनंद और शांति मिले… तो वह है, परमेश्वर का सानिध्य ध्यान, सिमरन, जाप, कीर्तन-भजन; सानिध्य के साधन हैं. यह गायन इसी आशय की जीवंत प्रस्तुति है. जीवन है संग्राम सुनिए और आनंद लीजिये अलोक सहदेव जी के इस मधुर गायन […]

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मौन भाव - अदभुत गायन, एकान्त में सुनिये

मौन भाव – अदभुत गायन, एकान्त में सुनने योग्य

संतजन हमेशा ही मौन भाव की महता समझाते रहे है. मौन भाव मौन का अभ्यास मानसिक रोगों जैसे चिंता, व्यग्रता, तनाव, संताप, अनिद्रा, ब्लडप्रेशर इत्यादि से रोगमुक्ति की अनुपम औषधि भी है. अपने आप को कभी भी, कमरे में बंद कर या किसी एकांत में, इस अनुपम प्रस्तुति का आनंद उठाईये. सुनिए, मौन भाव के […]

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ब्रह्म मुहूर्त

ब्रह्म मुहूर्त में उठिये – और पाईये 11 बेहतरीन स्वास्थ्य लाभ

ब्रह्म मुहूर्त में उठने के आध्यात्मिक लाभ तो हैं ही, आयुर्वेद और विज्ञान भी इसे स्वास्थ्य लाभ के लिये उत्तम मानते हैं.  शास्त्रों में उल्लेख है कि इस समय तक निद्रा त्याग कर लेना चाहिए. ब्रह्म मुहूर्त कब होता है रात्रि के अन्तिम प्रहर के तीसरे भाग के काल को ब्रह्म मुहूर्त कहते हैं.  ब्रह्म […]

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तुम ही मैं हूँ, फिर चिन्तन क्या, मैं ही तुम हो, फिर उलझन क्या

तुम ही मैं हूँ, फिर चिन्तन क्या – आलौकिक भजन

तुम ही मैं हूँ, फिर चिन्तन क्या, मैं ही तुम हो, फिर उलझन क्या आदरणीय आलोक सहदेव जी द्वारा श्रीरामशरणम् को समर्पित आलौकिक भजन, तुम ही मैं हूँ, फिर चिन्तन क्या आपजी की सेवा में प्रस्तुत तुम ही मैं हूँ, फिर चिन्तन क्या, मैं ही तुम हो, फिर उलझन क्या तुम ही मैं हूँ, मैं ही तुम […]

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भक्तिमय कर्मयोग

भक्तिमय कर्मयोग – जीवन जीने की आसान कला

परम पूज्य श्री डॉ विश्वामित्र जी महाराज श्री के मुखारविंद से जो अपने आप को, परमात्मा को समर्पित कर देता है, परमात्मा उसे अपने अनुसार चलाता है। यह बहुत गहरा भेद आ जाता है, उसे वह अपने अनुसार चलाता है। कर्मों के अनुसार नहीं चलाता। मानो जो उसके कर्म हैं, संचित भी है, भले ही शास्त्र […]

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