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पाचन रक्षा – ऑनलाइन पेट रोग सहायता प्रोग्राम

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सामान्यत: हम इलाज के उन बिन्दुओं से अनभिज्ञ रहते हैं जो दवाओं से भी बेहतर लाभ दे सकते हैं.  आहार में परिवर्तन, खानपान और नित नियम की आदतों में बदलाव, कुछ ऐसे ही आसान उपाय होते हैं जो बिना किसी औषधि के रोग निवारण की क्षमता रखते हैं.

पाचन रक्षा एक ऑनलाइन प्रोग्राम है, जो आपको आहार और दिनचर्या के उन तरीकों से अवगत कराता है जिन्हें अपना कर आप अपने रोग ठीक कर सकते हैं या बढ़ने से रोक सकते हैं.

यह एक स्वसहायता ऑनलाइन प्रोग्राम है जिसका उद्देश्य आपको पेट की स्वास्थ्य समस्यायों की सटीक जानकारी और इलाज के उन तरीकों के प्रति जागरूक बनाना है जिन्हें आप घर बैठे उपयोग कर सकें.

इस प्रोग्राम में आपको विभिन्न प्रकार की जानकारियां दी जाती हैं जो आपको रोग का सही निदान और इलाज करने में सहायता करती हैं. जानकारियाँ आपको सीधे ईमेल द्वारा भेजी जाती हैं.

अधिक जानकारी नीचे के भाग में देखिये.

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Description

दुनिया भर के चिकत्सा शास्त्रों में दो महत्वपूर्ण उल्लेख पाए जाते हैं…

1 सभी रोग पेट से उत्पन्न होते हैं

2 हम स्वयं ही अपने सबसे बेहतर डॉक्टर हो सकते हैं

क्योकि सभी रोगों के मूल में पेट की गड़बड़ ही बड़ा कारण होती है, इसलिए यदि हम पेट को स्वस्थ रखने के सूत्र जान लें, तो बेशक स्वस्थ रहा जा सकता है.

हम यदि पेट समस्याओं को ठीक से समझ लें, उनके कारणों को जान लें और समय रहते अपने आहार और नियमों में थोड़े बदलाव कर लें तो के रोगों को पनपने से रोका जा सकता है.

अक्सर यह देखा गया है हम अपनी समस्याओं को सही से पहचान नहीं पाते, क्योंकि हमें पेट समस्याओं का ज्ञान नहीं होता. जब पेट की समस्याओं का सही निदान (diagnosis) हो जाता है तो उपचार भी आसान और कारगर हो जाता है.

पाचन रक्षा – स्वस्थ पेट के सूत्र

पाचन रक्षा एक स्वसहायता ऑनलाइन प्रोग्राम है जिसका उद्देश्य आपको पेट की स्वास्थ्य समस्यायों से अवगत कराना और इलाज के उन विकल्पों के प्रति जागरूक बनाना है, जो घर बैठे आसानी से किये जा सकें.

सामान्यत: हम इलाज के उन बिन्दुओं से अनभिज्ञ रहते हैं जिनके बेहतरीन लाभ मिल सकते हैं.  आहार में परिवर्तन, खानपान और नित नियम की आदतों में बदलाव, कुछ ऐसे ही आसान उपाय होते हैं जो बिना किसी औषधि के रोग निवारण की क्षमता रखते हैं.

जब हम अपनी समस्या को समझे बिना चिकित्सक को लक्षण बताने में चूक कर देते हैं तो इलाज के भी गलत होने की सम्भावना बढ़ जाती है.

मान लीजिये, आपको एसिडिटी की समस्या है. आप जब डॉक्टर को केवल एसिडिटी बताएँगे, तो पूरी सम्भावना है कि आपको antacids पकड़ा दिए जायेंगे. और आपको फौरी राहत मिल जाएगी.

अगली बार जब यह समस्या होगी तो हो सकता हैं कि आप किसी केमिस्ट से खुद ही अन्तासिद ले आयें और फिर ठीक हो जायें.

जब समस्या बार बार होने लगेगी और आप बार बार antacids लें, तो एक मुकाम ऐसा भी आ सकता है कि acidity रोज़मर्रा की मुसीबत बन कर आपको तंग करने लगे.

अब देखिये, यदि आपको किसी ने बताया होता कि लगातार  हो रही एसिडिटी तो पनप रहे किसी रोग का एक लक्षण भर है, तो शायद आप रोग को पनपने ही न देते. लगभग पूरी सम्भावना होती कि आप केवल कुछ नियमों और खानपान में बदलाव कर ही इसे होने से रोक लेते और कोई रोग भी पनप नहीं पाता.

यह एक उदाहरण भर है. ऐसा ही पेट के अन्य लक्षणों के साथ भी हो जाया करता है, जैसे भूख न लगना, गैस का बनना, अफारा हो जाना, मुहं में कडवापन इत्यादि.

यह है पेट रोगों की पहली अवस्था, जिनकी हम परवाह नहीं करते. जबकि यही लक्षण आने वाले खतरे का सपष्ट संकेत देते हैं.

जब हम पहली अवस्था के लक्षणों को लम्बे समय तक अनदेखा करते हैं तो फिर अगली अवस्था के रोग पनप जाते हैं. और इन रोगों में बार बार शौच जाना लेकिन पेट साफ़ न होना, पेट में मरोड़ पड़ना, दस्त लग जाना, मल में आंव या खून आना, अमाशय में तेज़ जलन होना इत्यादि लक्षण होते हैं.

यह IBS संग्रहणी, SIBO, अलसर, GERD इत्यादि रोगों के लक्षण कहे जायेंगे.

जब दूसरी अवस्था में भी हम कुछ कोताही बरतते हैं तो फिर सिलसिला शरू होता है भांति भांति के स्वंयघाति (auto-immune) रोगों जैसे ulcerative कोलाइटिस, Crohn’s desease, Celiac इत्यादि का. इसे हम तीसरी अवस्था कह सकते हैं. इनमें दूसरी अवस्था के लक्षण अधिक तेज़ हो जाते हैं और साथ ही कमजोरी, बेचैनी, घबराहट, सुस्ती, अतिसार जैसे विकार भी होने लगते हैं.

अगली अवस्था में, दूसरी और तीसरी अवस्था के रोग अन्य कई रोगों को जन्म देने लगते हैं जिनमें आर्थराइटिस, यूरिक एसिड, थाइरोइड, डायबिटीज, फैटी लिवर इत्यादि कुछ ऐसे नाम हैं जिनसे हर कोई परिचित ही होता है.

अब देखिये, यदि आपको अपने लक्षणों के साथ साथ कुछ उपायों की जानकारी होती तो शायद समय रहते आप अपने रोग को दूसरी अवस्था से आगे नहीं बढ़ने देते.

और जब कोई रोग हो भी गए हों तो सही जानकारी आपको रोग प्रबंधन में अवश्य ही सहायता करती है.

प्रोग्राम रूपरेखा

यह प्रोग्राम आपको अपने आहार और दिनचर्या के ऐसे तरीकों से अवगत कराता है जिन्हें अपना कर आप अपने रोग को ठीक कर सकते हैं या बढ़ने से रोक सकते हैं.

आपको विभिन्न प्रकार की जानकारियां दी जाती हैं जो आपको रोग का सही निदान और उपचार करने में सहायता करती हैं.  यह जानकारियाँ आपको सीधे ईमेल द्वारा भेजी जाती हैं.

कैसे कम करता है यह प्रोग्राम

जानकारियों के विभिन्न अनुखंड अथवा मॉड्यूल (modules) हैं जिन्हें एक एक कर विस्तृत लेख के माध्यम से आपको ईमेल द्वारा भेजा जाता है. सलाह दी जाती है कि आप हर module को निर्देशानुसार 3 दिन 5 दिन या 7 दिन तक अपनायें और लाभ महसूस होने पर उसे जीवन का एक हिस्सा बना लें.

जैसे यदि किसी मॉड्यूल में आपको तीन पांच दिन के लिए गेहूं का उपयोग बंद करने की सलाह दी जाती है तो आपको वह करना चाहिए और तीन दिन बाद इसके प्रभाव को महसूस कर अपने अनुभव में जमा कर लेना चाहिए. यदि आपको गेहूं छोड़ने पर लाभ मिलता तो उसे जीवन में अपनायें; यदि नहीं मिलता है तो गेहूं का उपयोग जारी रखें.

इसी श्रृंखला में आपको सलाह दी जाती है, जिसमें आपको

1 या तो रोटी चपाती नहीं खाने की सलाह होती है, या फिर

2 रोटी चपाती खाने के तरीके में बदलाव किया जाता है या फिर

3 रोटी चपाती के बनाने के तरीके में कुछ बदलाव करने होते हैं.

यह सब गेहूं के आपके पेट पर होने वाले प्रभाव के कारण किया जाता है. इस प्रकार के modules अन्य कई आहारों पर भी होते हैं. हर module को आजमाकर आपके पेट के लिये हानिकारक आहारों को पहचान लिया जाता है, जिनसे आप स्वय भी दूर रहना या उपयोग के तरीके बदलना सीख जाते हैं.

आहारों के अतिरिक्त अन्य modules उन नियमों को पहचाने के लिए उपयोग किये जाते हैं जिनसे आपके रोग में लाभ मिलता हो. जैसे intermittent fasting, food time span, दिनचर्या बदलाव इत्यादि.

अनुखंड (Modules) विवरण

प्रोग्राम के विभिन्न अनुखंड अथवा मॉड्यूल (modules) के वर्तमान अध्यायों की संख्या 63 है जन्हें निरंतर उन्नयन के कारण बढाया या घटाया जा सकता है. जानकारियाँ मुख्यत: इन पहलुओं पर होती हैं:

1 खानपान: इसमें में विशेष बदलाव किये बिना खानपान बनाने या लेने के तरीकों में परिवर्तन सुझाये जाते हैं, जो आपके पेट के लिए लाभकारी रहें.

2 नियम रोग निवारण: ऐसे नियम जिन्हें अपनाने से राहत मिलती हो.

3 हानिकारक आहारों को लाभकारी बनाने के तरीके

4 भ्रांतियां और उन्मूलन: इसमें उन भ्रांतियों का निवारण किया जाता है जिनका न तो कोई वैज्ञानिक आधार होता है न ही आयुर्वेदीय.

5 आसान घरेलू विधियाँ: जिनसे आप कई लाभकारी और औषधीय वस्तुएं घर पर ही तैयार कर सकते हैं

6 पेट सही रखने के अनुभूत टिप्स, जो आसान भी होते हैं और कारगर भी

7 सर्वेक्षण और प्रतिक्रिया समाधान

प्रोग्राम अवधि

आप यह प्रोग्राम पांच से सात माह में पूरा किया जा सकता है. पहले एक दो माह में ही आप इतना ज़रूर जान लेते हैं कि आपको अपने रोग का प्रबंधन कैसे करना है. यदि आप इस अवधि में सारे मॉड्यूल पूरा नहीं कर पाते हैं तो आप अपनी सुविधानुसार भी कार्यान्वित कर सकते हैं.