देर है, अंधेर नहीं! – बहुत गूढ़ है यह सत्य
परमपूज्य डॉ विश्वामित्र जी महाराज के मुखारविंद से, देर है, अंधेर नहीं एकदा भगवान श्री कृष्ण भोजन के लिए बैठे हुए थे! एक दो कौर मुँह में लिये ही थे कि अचानक उठ खड़े हुए एवं बड़ी व्यग्रता से द्वार की तरफ भागे… फिर लौट आए… उदास… और भोजन करने लगे! रुक्मणी ने पूछा -प्रभु थाली […]





