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एंटी ऑक्सीडेंटस (Anti-Oxidants) – जानिए, क्यों होते हैं सेहत के लिए ज़रूरी

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सूक्ष्म स्तर पर हमारा शरीर अणुओं (Molecules) व परमाणुओं (Atoms) से बना है.

विभिन्न प्रकार के अणु जैसे कि Hydrogen, Oxygen, Iron, Phosphorus, calcium इत्यादि के संयोग से हमारी कोशिकाएँ (Cells) निर्मित होती हैं.

ऑक्सीडेशन

क्योंकि कोशिकायें हमारा एक जीवित अंश हैं इसलिए उनकी मृत्यु या विघटन (Decomposition) भी निश्चित है, जैसे सब जीवित प्राणियों की.

कोशिकाओं का जीवन चक्र कुछ घंटे से लेकर कुछ महीनों तक का होता है.

जब ये अपनी आयु पूरी कर लेती हैं तो इनकी मृत देह के अणु पुन: हमारे शरीर के प्रसार तंत्र में फ़ैल जाते है.

विघटन की इस क्रिया को Oxidation कहा जाता है.

फ्री रैडिकल्स

ऑक्सीडेशन की प्रक्रिया में अणुओं के अधिकाँश अंश तो अपने मूल यथारूप को पा लेते हैं.

लेकिन कई बार Oxygen के परमाणु अपने आप को दो दो के जोड़े बनाने से वंचित रह जाते हैं.

Oxygen के अणुओं को स्थायी रहने के लिये दो परमाणुओं की आवश्यकता रहती है.

एक परमाणु वाली लडखडाती ऑक्सीजन के पास केवल ही विकल्प बाकी होता है.

कि वह तुरंत किसी दूसरी कोशिका पर आक्रमण कर अपना एक अन्य साथी पा ले.

इस प्रकार के ऑक्सीजन के परमाणुओं को जो अपने मूल अणु रूप में स्थित नहीं हो पाते, मुक्तामूल (Free Radicals) कहा जाता है. (2)

क्या करते हैं फ्री रेडिकल्स

मुक्तामूल (Free Radicals) अत्यंत क्रियाशील होते हैं, जो अपने आप को संतुलित करने के लिये आस पड़ोस की कोशिकाओं को शिकार बना लेते हैं.

आपने ब्लीचिंग पाउडर को उपयोग किया होगा.

ब्लीचिंग अर्थात रंग या मैल के उड़ने के पीछे ऑक्सीजन के इन्ही free radicals का कारनामा होता है. 

ऐसे ही हमारे शरीर में भी फ्री रेडिकल या मुक्तामूल शरीर की सेहतमंद कोशिकाओं को नष्ट कर अपने आप को संतुलित करने का प्रयास करते रहते हैं,

जिससे हमारी स्वस्थ कोशिकाएं क्षतिग्रस्त होती रहती हैं.

एंटी ऑक्सीडेंटस (Anti-Oxidants) : संक्षिप्त परिचय

लड़खड़ाते  हुए Free radicals के लिये दो ही विकल्प बाकी होते हैं.

या तो ये अन्य पर आक्रमण कर अपने आपको संतुलित कर लें

या फिर कोई अन्य वस्तु इन्हें संतुलित कर दे(3).

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एंटीऑक्सीडेंट इन असंतुलित फ्री रेडिकल्स को संतुलन प्रदान कर उन्हें हमारी स्वस्थ कोशिकाओं को नुक्सान पहुंचाने से बचाते है.

ये शरीर में भी बनते हैं तथा आहार से भी मिलते हैं.

ये तीन प्रकार से हमें मिलते हैं:

1 Enzymes: जैसे कि catalase और superoxide dismutase

2 Vitamins: जैसे कि विटामिन A, C और E

3 Glutathione : ये धनिया, प्याज़, लहसुन, गोभी इत्यादि से बढ़ाये जा सकते हैं.

अधिक विवरण के लिये देखें glutathione

आहारों में एंटी ऑक्सीडेंटस

ताज़े फलों, सब्जिओं, अंकुरित आहार, मेवे गिरी इत्यादि से हमें कई प्रकार के एंटी ऑक्सीडेंटस उपलब्ध होते हैं.

ज़रूरत है तो केवल यह कि हम फलों, सब्जिओं, मेवागिरियों (dry fruits) का प्रचुर समावेश अपने आहार में करें. (4)

बेहतरीन वनौषधियाँ

अश्वगंधा, गिलोय, गोखरू, केवांच, आंवला, दारुहल्दी, हल्दी इत्यादि ऐसी वनस्पतियाँ हैं

जिनके उपयोग से Enzymes, Vitamins और Glutathione; तीनों ही पाये जा सकते हैं.

इसीलिए इन वनौषधियों को आयुर्वेद में रसायन और आधुनिक स्वास्थ्य शास्त्रों में adaptogen और immunity modulator कहा जाता है,

जिसका मतलब है तनावरोधी और रोगरोधी वनौषधि.

अमृतयोग एक ऐसा ही tonic अथवा रसायन है जिसके उपयोग से anti-oxidants भी मिलते हैं और adaptogen एवं immunity modulator तत्व भी.

इस लेख में जानिये अमृतयोग के बारे में सब कुछ.

सारशब्द

एंटी ऑक्सीडेंटस हमें मरने से तो नहीं रोक सकते लेकिन हमें कैंसर, डायबिटीज, आर्थराइटिस इत्यादि  कई  गंभीर रोगों से अवश्य बचा सकते हैं. 

एंटीऑक्सीडेंटस शरीर में भी उत्पन्न होते हैं.

इसके अतिरिक्त हमें फल सब्जियां भी खानी चाहिए जिस से हमें एंटी ऑक्सीडेंटस प्रचुर मात्रा में मिलते रहे. 

मुख चित्र आभार: Ben Mills’ own work for Wikipedia