स्तनपान

क्या आप स्तनदूध से चिंतित हैं? जानिए सब कुछ स्तनपान के बारे में!

शिशु को स्तनपान कराने का एहसास हर माँ के लिए अविस्मर्णीय, कीमती और ममता से भरा होता है।

माँ के दूध को अमृत के समकक्ष माना और बताया गया है

आखिर हो भी क्यों न; माता का दूध कई बीमारियों से बचाता भी है और स्तनपान से माँ और शिशु का रिश्ता नैसर्गिक रूप में मजबूत भी बनाता है।

लेकिन कई बार माँ के दूध में कमी आ जाती है जो चिंता की बात हो जाया करती है।

यह हो सकते हैं आपके प्रश्न 

क्या आप स्तनदूध की मात्रा को लेकर परेशान हैं?

आपके शिशु का विकास क्या रुक गया है?

क्या आप स्तनपान कराने में सक्षम नहीं हो पा रही हैं?

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जानिये सब कुछ

सबसे पहले तो अपने डर को निकाल दीजिये क्योंकि आप अकेले की ही यह एक की समस्या नहीं है।

बहुत सी ऐसी मातायें हैं जो अपने दूध की मात्रा और शिशु के विकास को लेकर चितिंत रहती हैं।

यदि आप भी चिंतित हैं तो नीचे दिए हुए संकेतो को अवश्य ध्यान से पढ़ें।

ये हैं अच्छे स्तनपान के संकेत

ये संकेत इतना अवश्य दर्शाते हैं कि आप के शिशु को पर्याप्त मात्रा में दूध मिल रहा  है।

1. आप आरामदायी स्तनपान  कराती हैं और आपको कोई दर्द महसूस नहीं होता।

2. आपका शिशु दिन में कम से कम छे से आठ बार संतुष्टि से स्तनपान कर रहा है।

3. स्तनपान के बाद आप स्तन को हलके और मुलायम महसूस करती  हैं।

4. स्तनपान के समय  आप शिशु को दूध निगलते देख और सुन सकती हैं ।

5. आपका शिशु स्तनपान के बाद स्वयं ही स्तन से दूर हो जाता है।

6. आपका शिशु २४ घंटे में कम से कम सात बार पेशाब करता है और उसका मल पीला होता है ।

फिर क्या है समस्या

असली समस्या यह नहीं है कि आप कितने दूध का उद्पादन कर पा रही हैं।

बल्कि समस्या ये है कि आपका शिशु कितना दूध पीने में सक्षम है।

ध्यान रखिये, शिशु स्तन को सही ढंग से मुँह में ले ताकि वह आसानी से  दूध पी सके।

स्तन दूध की आपूर्ति बढ़ाने  और उसे जारी रखने के लिए शिशु को बार बार और जब वो चाहे तब स्तनपान कराना जरुरी है।

यदि नवजात अधिक मात्रा में सोता है तो हो सकता है कि आपको उसे नींद से उठते ही स्तनपान कराना पड़े।

स्तनपान कराते समय अपने स्तन पर हल्का सा दबाव डालें।

इससे एक ही  बार  के स्तनपान के बाद स्तन पूरी तरह से खाली हो जायेगा।

स्तनपान कराते  समय अपना स्तन बारी बारी  से बदलते रहिये।

ऐसा करने से दोनों स्तन खाली होते रहेंगे और दूध उद्पादन की मात्रा बढ़ेगी।

और आपका शिशु भी आराम से स्तनपान कर पायेगा। शिशुओं को भी बदलाव अच्छा लगता है.

यह भी अवश्य जानिये कि आपका शरीर मांग के अनुसार ही  दूध का उद्पादन करता है।

यदि आप शिशु को स्तन दूध के बजाये डिब्बाबंद, अन्य दूध या अन्य अनुपूरक देती हों तो आप के स्तन दूध की मात्रा कम हो जाएगी।

जितना अधिक आप स्तनपान कराएंगी उतनी अधिक आपके शरीर में स्तन दूध की मात्रा बढ़ेगी।

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स्तनदूध आपूर्ति में उपयोगी आहार

यदि आपको  लगता है कि आप पर्याप्त मात्रा में स्तन दूध नहीं बना पा रही हैं, तो डॉक्टर की राय  लेना सर्वोत्तम है।

स्तनदूध की आपूर्ति बढ़ाने में मुख्यत:

मेथी के बीज, सौंफ, लहसुन, हरी पत्तेदार सब्जिया, जीरा, तिल के बीज, तुलसी, सुवा, लौकी, टिंडा जैसी की सब्जियां,

हर तरह की दाल, मेवे, और दलिया जैसे खाद्य पदार्थ सहायक  होते है.

तुलसी और करेलों को भी दूध की मात्रा बढ़ाने में महत्वपूर्ण माना जाता है

स्तनपान बढ़ाने वाली वनौषधियाँ

शतावरी, वराहिकंद, वनहल्दी, अश्वगंधा, गोखरू और गिलोय बेहतरीन स्तनदुग्ध कारक मानी जाती हैं.

इनका उपयोग कीजिये

लाभ ज़रूर मिलना चाहिये

याद रखिये, कोई विशेष खाद्य पदार्थ या चीज़ आपके स्तन के दूध को बढ़ाने मे तुरंत मदद नहीं कर सकती।

यह सिर्फ एक आम धारणा है।

इस मामले में सिमित शोध उपलब्ध हैं, और कुछ मामलों में तो इन भोजन की प्रभावशीलता प्रमाणित करने के लिए कोई वैज्ञानिक शोध भी उपलब्ध नहीं है।

क्या आपको अधिक खाने  पीने की जरुरत है?

यह दो बातो  पर निर्भर करता है।

पहली बात की गर्भवती होने से पहले आपका बीएमआई (BMI) सामान्य था या नहीं

और दूसरा यह कि गर्भावस्था के दौरान आपका वजन कितना बढ़ा।

यदि गर्भवती  होने से पहले आपका वजन कम या सामान्य था तो स्तनपान के दौरान कैलोरी की जरुरत पूरी करने के लिए आपको ज़्यादा खाने की जरुरत हो सकती है।

क्या स्तनों की मालिश से दूध उत्पादन में मदद मिलती है?

स्त्रियों में स्तनों की मालिश को लेकर जिज्ञासा रखना काफी आम है।

एक बात याद रखिये, स्तन की मालिश से दूध की मात्रा में कोई फर्क नहीं पड़ता है।

बेशक, इससे नलिकाओं को खोलने, सख्त हिस्से को नरम करने, और नसों के गुच्छे या गांठों को हटाने में मदद मिलती है।

मालिश से स्तनों की सूजन का खतरा भी काफी हद तक कम हो जाता है।

स्तनों की मालिश हलके हाथो से की जानी  चाहिए।

बेहतर हो यदि माता खुद अपने हाथों से ही स्तन पर हल्की सी मालिश करे।

सारशब्द

अंत में याद रखिये, ज़्यादा चिंता या तनाव भी माँ की सेहत के लिए हानिकारक हो जाते हैं।

क्या आपको ये माहिती मददरूप हुई?

कृपया अपना अनुभव हमारे साथ बांटिये ज़रूर





 

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