मिर्ची के गुण लाभ फायदे उपयोग

मिर्ची – जानिये शोध आधारित 9 उपयोगी स्वास्थ्य लाभ

मिर्ची अथवा मिर्च (Chilli pepper) को दशकों से पश्चिमी सभ्यताएं शक के नज़रिये से देखती रही हैं.

इसके ठीक उलट, आयुर्वेद में इसे कई रोगों का उपचार किया जाता है, एवं गुणकारी बताया जाता है.

मिर्ची के बिना भारतीय एवं एशिया के व्यंजनों की कल्पना करना मुश्किल काम है.

यदि कहा जाये कि भारतीयों एवं एशिया मूल के लोगों की उच्च इम्युनिटी के पीछे मिर्ची, हल्दी और अन्य गरम मसालों का ही योगदान है तो कोई अतिश्योक्ति नहीं.

क्योंकि अब विज्ञान भी ऐसा ही मानता है.

आईये जानते हैं मिर्ची के 9 शोध आधारित गुणों के बारे में…

1. मिर्ची देती है बेहतर मेटाबोलिज्म

मिर्ची के द्रव्य मेटाबोलिज्म को बूस्ट करने का काम करते हैं.

जिस कारण मोटापा, अपचन, हार्ट की कार्यकुशलता, इसके एंटीओक्सिडेंटस (Anti-oxidants) का मेटाबोलिज्म संबंधी क्रियाकलापों पर सकरात्मक प्रभाव पड़ता है.  (1)

 2. विषद्रव्यों की निस्सारक

मिर्च चयापचय (मेटाबोलिज्म) क्रिया को उत्प्रेरित कर लिवर तथा गाल ब्लैडर से टोक्सिंस को निकालने का बेहतरीन कार्य करती है.

इसका उत्तेजना बढ़ाने वाला तत्व कैप्सैसिन शरीर का तापमान बढ़ा कर इन विषद्रव्यों को पसीने तथा मूत्रत्याग से शरीर से बाहर कर देता है.

और जब विषद्रव्यों का निस्सारण हो जाता है तो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ जाती है.

3. रक्त थक्कों की रोकथाम

मिर्च रक्तवाही शिराओं में फैलाव लाकर रक्त के उत्तम  संचार में सहायता  करती है.

यह ट्राइग्लिसराइड एवं LDL ( बुरी कोलेस्ट्रॉल) में कमी लाती है जो ह्रदय रोग का मुख्य कारण हैं.

मूत्रल होने के कारण मिर्च उच्च रक्तचाप में भी सहायक होती है.

मिर्च के इन तीन गुणों के कारण ही इसे ह्रदय रोगों में लाभकारी माना गया है.

4. मोटापे में कारगर

मिर्च में पाए जाने वाले कैप्सैसिन में चर्बी को जलाने (विघटन) के गुण रहते हैं.

वास्तव में, अध्ययनों से पता चलता है कि प्रतिदिन 10 ग्राम मिर्ची के उपयोग से पुरुष महिलाओं दोनों में ही, चर्बी विघटन की क्रिया बढ़ जाती है, जो मोटापे से राहत देती है(2)

आयुर्वेद के ग्रन्थ “भाव प्रकाश” में सन्दर्भ है कि मिर्च व लहसुन खाने वालों को अधिक व्यायाम करने की आवश्यकता नहीं.

ये शायद मिर्च व लहसुन के फैट बर्निंग व कोलेस्ट्रॉल नियंत्रण गुणों को ही इंगित करता है.

शोध भी यही दर्शाते हैं कि मिर्ची खाने से फैट बर्निंग की क्रिया बढ़ जाती है.

भोजन के आरंभ में मिर्च खा लेने से भूख कम हो जाती है, जिस कारण हमारी कैलोरी लेने की मात्रा में भी कमी आ जाती है

और हम मोटापे से राहत पा सकते है.

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यदि मिर्ची तेज़ हो तो भोजन की कम मात्रा में ही हमें भरपेट का एहसास होता है.

5. दर्द निवारक

मिर्च में दर्द निवारक तत्व होने के कारण आजकल कई शोध चल रहे हैं.

गठियावात (Arthritis) में मिर्च लाभकारी पाई गई है.

यह मिर्ची के सूजन कम करने व दर्द निवारक गुणों के कारण होता है. (3)

कैप्सैसिन एक प्रभावी दर्द निवारक वनस्पतीय योग है.

यह शरीर में दर्द का अहसास करने वाले तंतुओं पर असर कर पीड़ा की वेदना की प्रतीति कम कर देती है.

6. कैंसर प्रतिरोधी

कैलिफ़ोर्निया कि लोमा लिंडा यूनिवर्सिटी के शोध के अनुसार मिर्च में कैंसर रोधी गुण पाए जाते हैं.

इस शोध ने फेफड़ों एवं लिवर कैंसर में कैप्सैसिन लाभकारी पाई है.

कुछ अन्य शोधों में भी ये सामने आया कि मिर्च के उपयोग से अपोप्टोसिस क्रिया (जिसमें कैंसर कोशिकाएं स्वयं को नष्ट कर लेती हैं) से लिवर, स्तन, प्रोस्टेट एवं त्वचा के कैंसर में सुधार आता है. (4)

मिर्च के कैंसर रोधी गुणों पर कई अन्य शोध अभी जारी हैं, जिनसे आने वाले समय में और जानकारी मिलने की आशा है.

7. पाचन शक्ति सहायक

मिर्च के पाचन सम्बन्धी गुण आयुर्वेद में वर्णित हैं.

ग्रामीण लोकधारणा है कि जहाँ भी जाएँ, वहां की मिर्च खा लेने से पेट कि गड़बड़ नहीं होती.

मुहं में लार से लेकर अमाशय एवं पित्त ग्रंथि के पाचक द्रव्यों के स्राव में मिर्ची सहायता करती है.

यही नहीं, मिर्ची युक्त भोजन से छोटी व बड़ी आंत में एंजाइम व बैक्टीरिया की कार्यकुशलता भी बढ़ जाती है

जिस कारण पाचन की प्रक्रिया में सुधार होता है तथा गैस इत्यादि की समस्या में लाभ मिलता है,

8. मुख दुर्गन्ध रोधी

मिर्च का उपयोग मुख दुर्गन्ध की रोकथाम में सहायक है.

तेज़ मिर्ची  से मुख के रोग कारक रोगाणु अपने झुरमुटनुमा संक्रमण स्थानों से विस्थापित हो लार द्वारा नष्ट हो जाते हैं.

यही कारण है कि मिर्च खाने वाली सभ्यताओं में मुख के रोग कम पाए जाते हैं.

मिर्ची mirch ke gun labh fayde

9. प्रासंगिक उपचार, उपयोग

मिर्च का उपयोग कई प्रकार के घरेलू उपचारों में भी किया जाता है,

कुनकुने पानी में मिर्च से दुखे गले के लिये गरारे करना,

तेल में मिर्च गर्म कर गठियावात, गाउट, इत्यादि की वेदना में लेप लगाना,

धूनी से आचार इत्यादि को जैविक विघटन  से बचाना, मिर्च के अन्य घरेलु उपयोगों में से है.

मिर्ची विशेष

हरी मिर्च से पकी लाल मिर्च के गुण अधिक होते हैं.

हरी मिर्च के औषधीय गुण कम होते हैं, इस में केवल विटामिन C ही अधिक पाया जाता है, अन्य कारगर तत्व नहीं.

यदि आप विटामिन C की नित्य भरपाई हरी मिर्च से करने की सोचें तो आपको 60 ग्राम हरी मिर्च खानी पड़ेगी.

एसिडिटी, IBS संग्रहणी, पेट के अलसर तथा बवासीर के रोग में मिर्ची नहीं खानी चाहिए.

यही ऐसे रोग हैं जिसमें लाल मिर्च खाने से नुकसान हो सकते हैं.

यह इन रोगों की उग्रता बढ़ा सकती है.

सारशब्द

मिर्च को नुकसानदायक मानना एक बीते युग की बात है, जो कई शोधों द्वारा नकारी जा चुकी है.

मिर्च का उचित उपयोग हमें कई रोगों से बचाने में सहायता कर सकता है.

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