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अलसी के 6 हानिकर प्रभाव नुकसान – ध्यान ज़रूर रखिये

अलसी के 6 हानिकर प्रभाव नुकसान alsi ke side effects alsi khane ke fayde nuksan

यदि आप भी इसी प्रभाव में हैं कि अलसी एक बेहतरीन आहार है जिसके कोई दुष्परिणाम नहीं, तो यह लेख आपके लिए है. अलसी के 6 हानिकर प्रभाव नुकसान ( Side effects) भी हैं जिन्हें नज़रंदाज़ नहीं किया जाना चाहिए.

इसमें कोई शक नहीं कि अलसी (Flax seed या Linseed) एक बेहतरीन आहार है.

जिसमें ओमेगा 3 और फाइबर प्रचुरता में पाए जाते हैं.

इन्हीं गुणों के चलते आज अलसी (Linum usitatissimum) और इसके तेल का दुनिया भर में एक बड़ा बाज़ार खड़ा हो गया है.

लेकिन सावधान, अलसी का अंधाधुन्द उपयोग कुछ रोगों को बढ़ा भी सकता है और कुछ परिस्थितियों में हानिकारक भी हो सकता है.

आईये जानते हैं सब कुछ…

अलसी के 6 हानिकर प्रभाव नुकसान

1 अलसी से एलर्जी हो सकती है

2010 में हुए एक शोध ने जिसमें 1317 लोगों ने भाग लिया था, पाया कि 5.8% लोग अलसी खाने से एलर्जी के शिकार हुए.

हालंकि यह कोई बड़ा आंकड़ा नहीं है, क्योकि एलर्जी उन लोगों में पाई गई जिन्हें पहले से ही गेहूं, मूंगफली, सोयबीन इत्यादि सही से हजम नहीं होते थे. (1)

फिर भी यदि आप पहली बार अलसी का सेवन कर रहे हैं इसके केवल 5 दाने खाकर 24 घंटे तक देख लें.

यदि खुजली होने लगे या शरीर पर चित्ते उभर आयें तो इसका उपयोग न करें.

2 अलसी खाने से मिनरल अवशोषण कम होता है

जिन्हें कैल्शियम, आयरन, या जिंक की कमी हो, उन्हें अलसी से दूर रहना चाहिए.

यह इसलिए क्योंकि अलसी में बड़ी उच्च मात्रा में phytic acid पाया जाता है (23−33 ग्राम प्रति किलोग्राम)

जो मिनरल्स को शरीर की कोशिकाओं तक नहीं पहुँचने देता. (2, 3)

यदि आप में इन तीनों मिनरल्स में से किसी की भी कमी है तो कमी पूरी होने तक अलसी से दूर ही रहें.

3 अलसी से थायरॉयड समस्या बढ़ सकती है

अलसी में प्राकृतिक रूप से cyanogenic glycosides नामक वानस्पतिक योग मिलते हैं.

यह जब शरीर में गंधक से मिलते हैं तो thiocyanates रुपी योग में बदल जाते हैं.

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यही thiocyanates थायरॉयड की कार्यप्रणाली को विकृत करने के कारक माने गए हैं (4).

यदि आप थायरॉयड समस्या से परेशान हैं तो अलसी से दूर ही रहें

क्योकि बताये गए योग अथवा रसायन आयोडीन के अवशोषण को भी बाधित करते हैं (5).

4 अलसी से पाचन समस्याएं बढ़ सकती हैं

IBS अथवा संग्रहणी रोग में पेट की समस्याए अचानक उग्र हो जाती हैं.

यदि आपकी पाचन शक्ति बलवान नहीं है तो अत्यधिक फाइबर पचाना भी मुश्किल हो जाता है.

जिस कारण अफारा, एसिडिटी, दस्त, पेट दर्द, मरोड़, उल्टी इत्यादि समस्याएं पैदा हो जाया करती हैं.

आपको चाहिए कि अलसी का उपयोग धीरे धीरे बढ़ाएं.

जब भी अलसी लें तो उस दिन पानी भी खुले दिल से पियें.

5 अलसी से गर्भावस्था में नुक्सान

कई स्वास्थ्य विशेषग्य यह अंदेशा जताते हैं कि गर्भावस्था में अलसी का उपयोग नवजात की सेहत पर विपरीत प्रभाव डाल सकता है.

इसके लिए वे अलसी के phytoestrogens को दोषी मानते हैं, जो एक प्रकार से महिला सेक्स हॉर्मोन की तरह व्यवहार करता है.

जानवरों पर हुए शोधों में यह सामने आया है कि गर्भावस्था में अलसी के उपयोग से नवजात बच्चों के वज़न में कमी आ सकती है

साथ ही उनकी प्रजनन प्रणाली भी बाधित हो सकती है (6, 7)

6 अलसी से रक्त पतला हो जाता है

इसे अलसी का गुण भी कहा जा सकता है. क्योकि यह गुण ह्रदय रोगियों जिनकी धमनियों में सिकुडन आ गई हो, के लिए लाभकारी है.

अलसी में उपलब्ध Omega3 रक्त को पतला कर देते हैं.

लेकिन यदि आप पहले से ही खून पतला करने की कोई दवा ले रहे हों तो आपको अलसी का उपयोग अपने डॉक्टर से सलाह के बाद ही करना चाहिए.

दवा और अलसी दोनों के इकट्ठे उपयोग कष्टदायी हो सकते हैं.

यदि कोई खून के पतले होने के किसी रोग जैसे Hemophilia इत्यादि से ग्रस्त हो,

तब भी अलसी का उपयोग बिना डॉक्टर की सलाह के न करें.

खून के अत्यधिक पतला होने पर धमनियों से शरीर के किसी भी अंग में रक्त स्राव हो सकता है जो घातक भी हो सकता है. (8, 9, 10)

कितनी अलसी खाएं

यदि आप पूरे स्वस्थ हैं तो भी अलसी का अधिक उपयोग ठीक नहीं.

एक स्वस्थ व्यक्ति के लिए दिन भर में पांच बड़े चम्मच तक की मात्रा ही सही पायी गयी है.

इससे अधिक मात्रा के दुष्परिणाम हो सकते हैं और कुछ मामलों में ख़तरनाक विषाक्त प्रभाव भी. (11)

यदि आपने कभी अलसी नहीं खाई है और इसका उपयोग करने की सोच रहे हैं,

तो शुरुआत में आधे चम्मच प्रतिदिन से सेवन शुरू कर धीरे धीरे मात्रा को बढ़ाएं.

लेकिन रोजाना की मात्रा पांच बड़े चम्मच से अधिक कभी न हो.

सारशब्द

अलसी के कुछ रोगों में दुष्प्रभाव भी हैं जिन्हें अनदेखा नहीं किया जा सकता.

एक कहावत है कि अति में अमृत भी विषतुल्य हो जाता है.

यदि अलसी को एक अमृत मान लिया जाये तो भी इसका अधिक उपयोग विषजन्य हो सकता है.

दिन भर में कभी भी इसके पांच बड़े चम्मच से अधिक उपयोग न करें.


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