PBF (पी बी एफ)

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PBF एक प्रीबायोटिक फार्मूला है जिसमें घुलनशील फाइबर के शोध प्रमाणित विकल्पों का बेहतरीन समावेश है.

यह एक नित्य लेने वाला उपयोगी योग है जो पेट के उपद्रवों से रक्षा करने में सहायक रहता है.

इसके उपयोग से पाचन संस्थान को बल मिलता है और कब्ज़, अतिसार व एसिडिटी, गैस जैसे विकारों से राहत मिलती है

जो आगे चलकर IBS (संग्रहणी) जैसे रोग में परिवर्तित हो जाते हैं.

PBF के नियमित उपयोग से आंतो के रिसाव (Leaky gut) और सूजन में भी आशातीत लाभ मिलता है, और ऑटोइम्यून बिमारियों से बचाव हो जाता है.

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फाइबर का हमारे पाचन संस्थान स्वास्थ्य से विशेष सम्बन्ध है.

आजकल के खानपान जिनमें प्रोसेस्ड आहारों का अनुपात बढ़ गया है, फाइबर की कमी से पेट के कई रोग उत्पन्न हो रहे हैं.

और जो फाइबर युक्त आहार हम ले भी  रहे हैं उनमें मुख्यता अघुलनशील फाइबर की ही अधिकता रहती है न कि घुलनशील फाइबर की.

पेट के कई विकारों जैसे कब्ज़, एसिडिटी, अतिसार इत्यादि में घुलनशील फाइबर की कमी का उतना ही योगदान है जितना कि एंटीबायोटिक, दर्दनिवारक, antacid दवाओं और अनुचित खानपान का.

यही पेट के रोग आगे जाकर अन्य रोगों जैसे IBS (संग्रहणी), अलसर, पेट की सूजन में परिवर्तित हो जाते हैं.

और फिर आरम्भ हो जाता है सिलसिला डायबिटीज, आर्थराइटिस, गाउट, यूरिक एसिड, थायरॉयड जैसी auto-immune बीमारियों का.

यदि हम अपने खानपान में घुलनशील फाइबर का उचित समावेश रखें तो पेट के लाभकारी बैक्टीरिया का उचित संतुलन बना रहता है,

और हमारा पाचन संस्थान बेहतर स्वास्थ्य में रहता है.

यह कोलेस्ट्रॉल कम करने और वज़न घटाने में भी लाभकारी रहता है. (1, 2)

PBF एक उत्तम प्रीबायोटिक फार्मूला है जिसमें घुलनशील फाइबर के शोध प्रमाणित विकल्पों का बेहतरीन समावेश है.

इसके उपयोग से पाचन संस्थान को बल मिलता है और कब्ज़, अतिसार व एसिडिटी, गैस जैसे विकारों से राहत मिलती है.

नियमित उपयोग से आंतो के रिसाव (Leaky gut) और सूजन में भी आशातीत लाभ मिलता है.

संयोजक तत्व

PBF के प्रति 5 ग्राम मुख्य संयोजक तत्व इस प्रकार हैं

Astragulus gummifer, Cyamopsis tetragonoloba 800mg each, Plantago psyllium 400mg each,

Mastic gum, Acacia arabica, Slippery elm 200mg each,

Desiccated coconut 2400mg

पैकिंग

Quantity 150 grams in HDPE broad-mouth jar.

लेने की विधि

आधा से एक चाय का चम्मच, भोजन के अन्त में या 15-20 मिनट बाद, आधी कटोरी दही, छाछ या पानी में मिलाकर, दिन में दो बार।

रात्री की खुराक गरम या ठंडे दूध में मिलाकर भी ली जा सकती है।