आक, मदार के 13 औषधीय गुण और उपयोग aak madar akda ke gun labh fayde upyog

आक, मदार के 13 औषधीय गुण और उपयोग

आक अथवा मदार का उपयोग आयुर्वेद, होम्योपैथी और एलोपैथी सभी में किया जाता है.

यह एक मृदु उपविष है जिसका उपयोग आयुर्वेद में कई असाध्य और हठी रोगों के लिए बताया गया है.

जानिये क्या हैं आक, मदार के 13 औषधीय गुण और उपयोग.

आक की पहचान

मदार अथवा आक का पौधा 120 सेमी से 250 सेमी तक लम्बा होता है।

हिमालय के बर्फीले ठन्डे क्षेत्रों को छोड़ ये लगभग पूरे भारत में पाया जाता है।

इसका english name: crown flower है और botanical name: Calotropis gigantea. (कैलोट्रोपिस जाइगैण्टिया).

इसे अन्य नामों आर्क, आकड़ा, आँकड़ा, अकुआ, मदार. आख, अकवन, ਅੱਕ, इत्यादि से भी जाना जाता है.

इसकी कई उपप्रजातियाँ होती हैं जिनके फूल सफ़ेद, नीले, हलके जामुनी या सफ़ेद मिश्रित जामुनी रहते हैं.

औषधीय उपयोग में केवल सफ़ेद आक का ही उपयोग करना चाहिए.

नीली प्रजातियाँ अधिक विषैली होती हैं और उनका उपयोग खाने में नहीं किया जाता, केवल बाह्य उपयोग ही किया जाता है.

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आक, मदार के 13 औषधीय गुण और उपयोग

1 IBS संग्रहणी

रोज़ आक के पांच फूल खाने से IBS संग्रहणी के उपद्रव शांत होते हैं और पेट की इन्फेक्शन में लाभ मिलता है.

मार्च अप्रैल में इसके फूल आते हैं.

एक माह तक इन्हें उपयोग कीजिये, पूरा साल लाभ पायेंगे.

2 बवासीर

सूर्योदय से पहले आकडे़ की 3 बूंद दूध बताशे में डालकर खाने से बवासीर में लाभ होता है।

3 आधे सिर का दर्द (Migraine)

माइग्रेन में यदि दर्द सूर्योदय के साथ बढ़ता-घटता हो तो सुबह सूरज उगने से पहले 1 बताशे पर 2 बूंद आकड़े के दूध को टपकाकर खांये।

शीघ्र ही लाभ होगा।

4 घट्टा कॉर्न (Corn)

मदार का दूध और गुड़ दोनों को समान मात्रा में मिलाकर घट्टा (आटण) पर लगाने से घट्टा ठीक हो जाता है।

5 पेटदर्द

आकड़े के जड़ की छाल, नौसादर, गेरू, कालीमिर्च सभी समान मात्रा में 1-1 चम्मच लेकर पीस लें।

इसमें आधा चम्मच कपूर पीसकर मिला लें।

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गर्म पानी से इसकी आधी चम्मच फंकी ले लें.

पेट में दर्द, कब्ज, दस्त, तिल्ली, यकृत आदि पेट के सभी रोग, बुखार में लाभ होता है।

6 दमा, खांसी कफयुक्त

1 आकड़े के चार पत्ते, आठ चम्मच कालीमिर्च दोनों को एक साथ बारीक पीसकर मटर के दाने के बराबर गोलियां बना लें।

दस दिन तक इसकी एक गोली सुबह-शाम गर्म पानी से लें।

दमा कफयुक्त, खांसी, हिस्टीरिया में लाभ होगा।

2 आकड़े का एक पत्ता 25 कालीमिर्च के साथ पीसकर कालीमिर्च के बराबर ही गोलियां बना लें।

7 गोली वयस्कों को तथा दो गोली बच्चों को देने से दमा (श्वास) रोग नष्ट हो जाता है।

3 धाणी (सेके हुए जौ) को आधा कप आकड़े के दूध में 15 दिन तक भिगो दें।

इसके बाद सुखाकर पीस लें।

इसे चौथाई चम्मच की मात्रा में शहद के साथ मिलाकर एक बार नित्य चाटें।

दमा में लाभ होताहै।

आकड़े के पत्ते का छोटा-सा टुकड़ा पान में रखकर नित्य 40 दिन तक खाने से हर प्रकार का दमा, खांसी ठीक होता है।

7 यक्ष्मा (Tubercolosis)

आकड़े का दूध 4 चम्मच और 200 ग्राम पिसी हुई हल्दी मिलाकर पीसें।

पीसते-पीसते सूख जाने पर शीशी भरकर रख लें।

यह पाउडर एक चने के बराबर आधा चम्मच शहद में मिलाकर नित्य 4 बार चाटें।

टी.बी. के रोगी 3 माह में ठीक हो जायेंगें। टी.बी. में रक्त की उल्टी भी ठीक हो जायेगी।

असाध्य टी.बी. रोगी भी लाभान्वित होंगें।

8 बुखार

आकड़े की कोंपल आखिरी छोर (नया पत्ता) नागरबेल के पान में रखकर थोड़ी सी सौंफ डालकर चबायें।

इससे हर प्रकार का बुखार, मलेरिया, वायरल, सामान्य बुखार एक बार लेने से ठीक हो जाते हैं।

9 मलेरिया

आकड़े के फूल की दो डोडी (बिना खिले फूल) जरा-से गुड़ में लपेटकर मलेरिया ज्वर आने से पहले खाने से मलेरिया नहीं चढ़ता है।

10 बालतोड़

आक का पत्ता गर्म करके बालतोड़ पर लगाकर बांध दें।

इसके फूल की डोडी के अंदर का छोटा टुकड़ा गुड़ में लपेटकर खाने से भी बालतोड़ नष्ट हो जाता है।

11 जुकाम

जुकाम हो, नाक बंद हो तो आकड़े के 2 चम्मच दूध में 2 चम्मच चावल भिगों दें और छाया में पड़ा रहने दें।

जब सूख जाये तो पीसकर कपड़े से छान लें।

इसे जरा-सा सूंघें।

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नाक छींकें आकर खुल जायेगी, जुकाम ठीक हो जायेगा।

रुका हुआ पानी टपकने लगेगा।

इसे सूंघने से छीकें अधिक आयें तो देशी घी गर्म करके सूंघे।

12 जोड़ों का दर्द

एक मुट्ठी आकड़े के फूल 2 गिलास पानी में रात को उबालें और इसकी भाप से जोड़ों को सेंके।

इसके बाद गर्म-गर्म फूलों को जोड़ों पर बांध लें।

एक सप्ताह नित्य इस प्रकार करते रहने से दर्द दूर हो जायेगा।

शरीर के किसी भी अंग में दर्द हो तो इस प्रयोग से लाभ होगा।

13 पथरी

आकड़े के 10 फूल पीसकर 1 गिलास दूध में घोलकर प्रतिदिन सुबह 40 दिन पीने से गुर्दे और मूत्राशय की पथरी निकल जाती है।

आक के दुष्प्रभाव का निवारण

आक, मदार एक विषैली वनस्पति है इसलिए इसका उपयोग सीमित मात्रा में ही किया जाता है.

पत्ते, फूल या अन्य कोई भाग अधिक सेवन करने से दुष्परिणाम उत्पन्न हो गये हों तो ढाक (पलाश) के पत्तों को उबालकर उसका पानी पीने से आकड़े की विषाक्तता दूर हो जाती है।

आकड़े का दूध लगाने से यदि घाव हो जाये तो भी ढाक (पलाश) के पत्तों को उबालकर बने पानी से घावों को धोयें।

आक के अन्य उपयोग

आक के उपयोग की अध्यात्मिक और तांत्रिक मान्यतायें भी प्रचलित हैं.

ऐसी मान्यता है कि पुराने आक की जड़ में गणेश जी की मूर्ती बन जाती है.

आक को पानी देने से शंकर भगवान प्रसन्न होते हैं, और भक्तों की मनोकामनाएं पूरी कर देते हैं.

आक की रुई से बनाई गयी दीप बाती जलने से भी महादेव शिव प्रसन्न होते हैं.

और आक के उपयोग से वशीकरण किया जा सकता है, इत्यादि इत्यादि.


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