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भूमि आंवला (Bhumi amla)- लिवर, किडनी और High BP का बेजोड़ टॉनिक

प्रकृति का ऐसा विधान है कि जिस मौसम के जो रोग विशेष होते हैं, हमें उनकी  वनौषधियाँ भी उपलब्ध  कर देती है.

भूमि आंवला – लिवर और high BP का बेजोड़ टॉनिक इसका एक सटीक उदाहरण है.

गर्मियों और बरसात के मौसम में हमारी पाचन शक्ति कमज़ोर हो जाती है.

और हमारी लिवर कार्यक्षमता भी मंद पड़ जाती है.

यदि इस मौसम में हम लिवर की पसंदीदा वनस्पतियाँ लें तो पेट की गड़बड़ या लिवर रोग जैसे पीलिया (Jaundice) इत्यादि का कोई भय नहीं रहता.

भू-आमलकी या भूमि आंवला (Bhumi anwla या amla), भुई आंवला (Phylanthus amarus व Phylanthus niruri) एक ऐसी रामबाण वनौषधि है जो हमारे लिवर को अति प्रिय है.

भूमि आंवला की पहचान

यह बसंत ऋतु से लेकर  बरसात के मौसम के अंत तक लगभग पूरे भारतवर्ष में दिख जाता है.

भूमि आंवला की खेती करने की कोई आवश्यकता नहीं होती क्योकि यह लगभग 1.5 फीट से 2 फीट ऊंचा एक वर्षीय पौधा होता है

जो बरसात के समय खेतों में खरपतवार के रूप में उगता दिखाई देता है।

यद्यपि आंवला की तुलना में यह पौधा बहुत छोटा होता है…

परन्तु आवंला के पौधे जैसे पत्तों तथा पत्तों के पीछे नीचे छोटे-छोटे आंवला जैसे फल लगने के कारण ही संभवतया इसको जमीन का आंवला अथवा ‘भुंई आमला’ कहा जाता है।

भूमि आंवला का पौधा

भारत में पाया जाने वाला भूमि अमला का सही वानस्पतिक नाम Phylanthus amarus है न कि Phylanthus niruri.

ऐसा वनस्पति विज्ञानियों का मत है. (Courtesy: Dr. Surendra Singh)

Prof. Surendra Singh ने  नीचे दिया चित्र भी भेजा है. 

विभिन्न भाषाओं में भूमि आंवला

  • हिन्दी : भुंई आमला, भूआमलकी, हजारदाना, जरमाला, जंगली आंवला
  • संस्कृत  : भूम्यामलकी, भूधात्री, तामलकी, बहुफला
  • बंगाली  : भुंई आमला (Bhuin Amla)
  • गुजराती  : भोंय आंवली (Bhoyen Anwali)
  • मराठी  : भुंई आंवली (Bhuin Anwli)
  • कन्नड़  : किरनेलीगिन्डा, किरूनेल्ली, नीलानेल्ली
  • मलयालम: कीझारनेल्ली, किलानेल्ली, किलु कानेल्ली, किरगानेल्ली, किरूतानेल्ली
  • उड़िया  : भुंई औला (Bhuin Aola)
  • तमिल  : कीझानेल्ली, कीझाक्कानेल्ली
  • तेलगू  : नेलाउसिरीकी
  • वानस्पतिक नाम  : फाईलेन्थस एमेरस व फाईलेन्थस निरूरी (Phylianthus amarus and P. niruri)

भूमि आंवला – लिवर और high BP का बेजोड़ टॉनिक

भुंई आमला का सम्पूर्ण पंचांग (जड़, तना, पत्ती, पुष्प, फल) औषधीय उपयोग का होता है।

आयुर्वेद व लोक परंपराओं के अनुसार इसे लिवर संबंधित विकारों विशेषतया पीलिया तथा हैप्टीटाइटस-बी के उपचार हेतु प्रयुक्त किया जाता है।

भूमि आंवला के गुण लिवर, किडनी, डायबिटीज और पेट के लिये श्रेष्ट माने जाते हैं.

लिवर पर विस्तृत जानकारी इस लेख में देखिये

इसके पत्तों में पौटाशियम की काफी अधिक मात्रा (लगभग 0.83 प्रतिशत) होने के कारण यह एक उत्तम मूत्रल (Diuretic) भी है।

लिवर संबंधी विकारों के साथ-साथ भूमि आंवला का उपयोग उच्च रक्तचाप (High Blood Pressure), बुखार,

मधुमेह (Diabetes) , घमौरिया, आंखों की बीमारियों, खुजली तथा चर्मरोगों, फोड़ों,

पेशाब से संबंधित विकारों जैसे पेशाब में खून आना, पेशाब में जलन होना आदि के उपचार के लिये भी किया जाता है।

इसकी जड़ों से उपयोगी टांनिक बनाया जाता है जिसे पुरानी कब्ज में प्रत्युक्त किया जाता है।

इसके मुख्य घटक फाइलेन्थिन तथा हाईपोफाइलेन्थिन होते हैं, जिनके औषधिय गुणों पर कई शोध हो चुके हैं.

शाक में फाइलेन्थिल तत्व की मात्रा 0.4% से 0.5% तक होती है।

निःसंदेह ही भुंई आवला एक प्रभावशाली औषधीय उपयोग का पौधा है.

विशेष रूप से हैप्टीटाइस-बी जैसी जानलेवा बीमारियों के उपचार में प्रभावी सिद्ध होने के कारण इस पौधे की उपयोगगिता और भी बढ़ गई है।

सारशब्द

भूमि आंवला – लिवर, किडनी और high BP का बेजोड़ टॉनिक एक बेहद उपयोगी वनस्पति है.

यह लगभग सभी लिवर टॉनिक और high BP की दवाओं का मुख्य घटक होता है.

यह पेट के कई रोगों में भी हितकारी है.

यदि हम गर्मियों और बरसात में इस वनौषधि का उपयोग करते हैं तो high BP, लिवर, किडनी व पेट के कई रोगों से बचा जा सकता है.





 

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