पानी पीने के आयुर्वेदीय निर्देश

पानी पीने के आयुर्वेदीय निर्देश

आयुर्वेद में पानी अथवा जल पर पूरा एक अनुभाग उपलब्ध है जिसे वारिवर्ग कहा जाता है. इस वर्ग में पानी की किस्मों, पीने के तरीकों, मात्रा, रोगानुसार अनुपान इत्यादि सभी उपलब्ध हैं. यह पानी पीने के आयुर्वेदीय निर्देश आपको रोगमुक्त तो रखेंगे ही, साथ में पानी पीने पर आत्मिक प्रन्नता भी देंगे.

इस वर्ग में दिए निर्देशों का उल्लेख करना इसलिए ज़रूरी हो जाता है क्योंकि आजकल पानी पीने के इतने गलत तरीके बताये जाते हैं जिन्हें अपनाने से कई लोगों को लाभ मिलने की अपेक्षा नुकसान भी हो रहे हैं और उनके रोग भी उग्र हो रहे हैं.

आपका मन ठंडा पानी पीने का है लेकिन आपने कहीं पढ़ लिया या किसी ने आपको बता दिया कि ठंडा पानी नहीं पीना चाहिए – तो ज़ाहिर है आपको लाभ की जगह नुकसान ही होगा.

आईये जानते हैं क्या कहता है आयुर्वेद पानी के बारे में…

पानी पीने के आयुर्वेदीय निर्देश

1 गुणकारी जल

जो जल अति शीतल, स्वच्छ, गंधरहित हो तथा जिसका रस पूर्ण रूप से मालूम न पड़ता हो, पीने से शीघ्र प्यास को शांत करने वाला, लघु तथा ह्रदय के लिए हितकर या ह्रदय को प्रिय हो; तो उसे प्रशस्त गुणवाला अर्थात उत्तम जल समझाना चाहिए.

यहाँ दो बातें ध्यान देने योग्य है.

अति शीतल और ह्रदय को प्रिय.

इनसे समाधान हो जाता है कि स्वस्थ व्यक्ति को वही पानी पीना चाहिए जो ठंडा हो और जिसे पीने के लिए उसका मन करता हो.

आपको बिना मतलब कुनकुना गर्म जल पीने की कोई आवश्यकता नहीं.

2 जल पीने की विधि

भोजन के समय कुछ भी जल न पीने से अन्न नहीं पचता है और अधिक जल पीने से भी यही दोष होता है. अतैव मनुष्य को चाहिए कि भोजन समय में अग्नि बढाने के लिए थोडा थोडा करके (घूँट घूँट भर) बारम्बार जल पियें.

आजकल कहा जाता है कि भोजन के समय बिलकुल जल नहीं पीना चाहिए, क्योकि इससे पेट की अम्लता कम हो जाती है. यह भी कहा जाता है कि खाना खाने के आधे घंटे बाद ही पानी पीना चाहिए.

पानी pani ke gun labh fayde

हमारी पाचन क्रिया मुहं से आरम्भ होकर बड़ी आंत तक जाती है. मुहं की लार का उतना ही महत्त्व है जितना कि अमाशय के अम्ल का. अमाशय में अम्ल की मात्रा भोजन के पाचन की कारक होती है न कि उसकी अम्लता. इसलिए भोजन के साथ यदि आप दो चार घूँट पानी पीते हैं तो फायदा ही है.

आपने अक्सर महसूस किया होगा कि खाना खाने के बीच या बाद में पानी पीने को मन करता है. इसे दबाना ठीक नहीं. यह एक नैसर्गिग प्यास है जिसे अवश्य ही पूरा किया जाना चाहिए. यदि भोजन काल में आप पानी की जगह छाछ या मठा लेते हैं तो वह भी पानी का लाभ दे देते हैं.

आपने यह भी देखा होगा कि परिश्रम मजदूरी करने वाले खाना खाते ही भरपेट पानी पी लेते हैं. उन्हें कोई तकलीफ नहीं होती, बल्कि उनका पाचन हमारे पाचन से अधिक शक्तिशाली होता है.

3 शीतल जलपान के योग्य लोग

पित्त रोग, मूर्छा, गर्मी, दाह, विष, रक्तविकार, श्रम, मदात्य, भ्रमरोग, वमन जैसे रोग्वालों के लिए और जिनका अन्न पचा हुआ न हो; ऐसे लोगों के लिए शीतल जल पीना हितकर होता है.

4 शीतल जलपान के निषेध विषय

पसली का दर्द, जुकाम, वातरोग, अफारा, बद्धकोष्ठ (कब्ज़) नवीन ज्वर, अरुचि, ग्रहणी, श्वास, खांसी, हिचकी तथा तेल घी आदि पीने पर (आयुर्वेद में तेल घी पीने का विधान भी है) शीतल जल पीना त्याग देना चाहिए.

5 थोड़े जलपान के विषय

अरुचि, मन्दाग्नि, जुकाम, शोथ, मुखप्रसेक (मुख में पानी भर आना), उदररोग, नेत्रविकार, ज्वर, व्रण (घाव) और मधुमेह (diabetes) में रोगी को थोडा थोडा जल पीना चाहिए, एकदम पेट भर नहीं.

6 अंशूदक – विशेष गुणकारी जल

जिस जल के ऊपर सारा दिन सूर्य की किरणें पड़ी हों और साड़ी रात चंद्रमा की किरणें पड़ी हों उसे ‘अंशूदक’ कहते हैं. यह जल स्निग्ध गुणयुक्त, त्रिदोषनाशक, निर्दोष, आन्तरिक्ष जल के समान, बलकारक, रसायन, मेधा के लिए हितकर, शीतल, लघु तथा अमृत के सामान होता है.

आप इस जल को स्वयं तैयार कर सकते हैं. कांच की बोतल में पानी भर कर पूरा दिन धूप में रखें, फिर रात को भी चांदनी में पड़ा रहने दें. अगले दिन सुबह फ्रिज में रख लें और उपयोग करें. यह निश्चय ही लाभकारी होता है. बस एक बात है कि यह केवल महीने में 15-16 दिन ही तैयार किया जा सकता है – जब चान्दनी रातें हों.

7 पानी पचने की समय अवधि

पानी पचने के तीन परिमाण बताये गए हैं, जो इस प्रकार हैं:

अति शीतल जल (Chilled water) एक प्रहर (3 घंटे) में पचता है.

साधारण जल (सामान्य ) जल दो प्रहर (6 घंटे) में पच जाता है.

औटाकर किंचित गरम जल (shaked water) पीने से आधे प्रहर (डेढ़ घंटे) में पचता है.

सारशब्द

सामान्यत: पानी ठंडा ही पीना चाहिए. यदि आप स्वस्थ हैं तो आपका मन  ठंडा पानी ही पसंद करता है. भोजन के बीच  दो चार घूँट पानी अवश्य पीना चाहिए. पानी उतना पीना चाहिए जो प्यास को बुझा कर तृप्ति दे. और सबसे बड़ी बात. पानी तब पीना चाहिए जब आपका मन करे.





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